Off The Screen-Sor
टेलिविजन पत्रकारिता, जिसमें कैमरा, माइक, विज़ुअल, बाईट और पीटीसी को जोड़कर कैमरामैन और ड्राइवर की मदद से स्टोरीज तैयार होती हैं - ऐसी रिपोर्टिंग की चुनौतियाँ आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में लगातार बड़ी हो रही हैं I बृजेश राजपूत के इन 75 लेखों के संकलन में आप तरह-तरह की घटनाओं को केवल पढ़ ही नहीं रहे, बल्की उस घटना को रिपोर्टर की भांति देख और सुन भी रहे हैं I ऑफ द स्क्रीन, टीवी के पर्दे पर चलने वाली स्टोरी के पीछे घंटों की मारामारी, उसके पीछे के रोमांच और कवरेज की चुनौतियों वाली कहानी है I
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टेलिविजन पत्रकारिता, जिसमें कैमरा, माइक, विज़ुअल, बाईट और पीटीसी को जोड़कर कैमरामैन और ड्राइवर की मदद से स्टोरीज तैयार होती हैं - ऐसी रिपोर्टिंग की चुनौतियाँ आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में लगातार बड़ी हो रही हैं I बृजेश राजपूत के इन 75 लेखों के संकलन में आप तरह-तरह की घटनाओं को केवल पढ़ ही नहीं रहे, बल्की उस घटना को रिपोर्टर की भांति देख और सुन भी रहे हैं I ऑफ द स्क्रीन, टीवी के पर्दे पर चलने वाली स्टोरी के पीछे घंटों की मारामारी, उसके पीछे के रोमांच और कवरेज की चुनौतियों वाली कहानी है I
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टेलिविजन पत्रकारिता, जिसमें कैमरा, माइक, विज़ुअल, बाईट और पीटीसी को जोड़कर कैमरामैन और ड्राइवर की मदद से स्टोरीज तैयार होती हैं - ऐसी रिपोर्टिंग की चुनौतियाँ आज की तेज़ रफ़्तार ज़िन्दगी में लगातार बड़ी हो रही हैं I बृजेश राजपूत के इन 75 लेखों के संकलन में आप तरह-तरह की घटनाओं को केवल पढ़ ही नहीं रहे, बल्की उस घटना को रिपोर्टर की भांति देख और सुन भी रहे हैं I ऑफ द स्क्रीन, टीवी के पर्दे पर चलने वाली स्टोरी के पीछे घंटों की मारामारी, उसके पीछे के रोमांच और कवरेज की चुनौतियों वाली कहानी है I










