Baarahmasa
‘बारहमासा’ कविता-संग्रह, साल के बारह महीनों पर प्रेम और जीवन के विभिन्न अनुभवों को जोड़-तोड़कर लिखी गईं कविताओं का संकलन है। इसमें जनवरी से लेकर दिसंबर महीने तक की छवियाँ अंकित हैं। कविताएँ इसलिए नई और अलग हैं, क्योंकि इनमें सिर्फ़ प्रेम नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम कार्य-व्यापार को गहराई से दर्ज किया गया है। यहाँ प्रेम है, प्रकृति है, समाज है, स्त्री है, मज़दूर और किसान हैं, राजनीति है, पूँजी के कारनामे हैं, सत्ता की निरंकुशता है, गाँधी हैं और वे सब गतिविधियाँ हैं, जो एक संवेदनशील रचनाकार को उत्तेजित करती हैं, परेशान करती हैं, निराश करती हैं और वे भी स्थितियाँ हैं, जो कभी उल्लास, उमंग, आशा और ख़ुशियों का कारण बनती हैं तथा सुख में डालती हैं।
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‘बारहमासा’ कविता-संग्रह, साल के बारह महीनों पर प्रेम और जीवन के विभिन्न अनुभवों को जोड़-तोड़कर लिखी गईं कविताओं का संकलन है। इसमें जनवरी से लेकर दिसंबर महीने तक की छवियाँ अंकित हैं। कविताएँ इसलिए नई और अलग हैं, क्योंकि इनमें सिर्फ़ प्रेम नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम कार्य-व्यापार को गहराई से दर्ज किया गया है। यहाँ प्रेम है, प्रकृति है, समाज है, स्त्री है, मज़दूर और किसान हैं, राजनीति है, पूँजी के कारनामे हैं, सत्ता की निरंकुशता है, गाँधी हैं और वे सब गतिविधियाँ हैं, जो एक संवेदनशील रचनाकार को उत्तेजित करती हैं, परेशान करती हैं, निराश करती हैं और वे भी स्थितियाँ हैं, जो कभी उल्लास, उमंग, आशा और ख़ुशियों का कारण बनती हैं तथा सुख में डालती हैं।
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‘बारहमासा’ कविता-संग्रह, साल के बारह महीनों पर प्रेम और जीवन के विभिन्न अनुभवों को जोड़-तोड़कर लिखी गईं कविताओं का संकलन है। इसमें जनवरी से लेकर दिसंबर महीने तक की छवियाँ अंकित हैं। कविताएँ इसलिए नई और अलग हैं, क्योंकि इनमें सिर्फ़ प्रेम नहीं, बल्कि दुनिया के तमाम कार्य-व्यापार को गहराई से दर्ज किया गया है। यहाँ प्रेम है, प्रकृति है, समाज है, स्त्री है, मज़दूर और किसान हैं, राजनीति है, पूँजी के कारनामे हैं, सत्ता की निरंकुशता है, गाँधी हैं और वे सब गतिविधियाँ हैं, जो एक संवेदनशील रचनाकार को उत्तेजित करती हैं, परेशान करती हैं, निराश करती हैं और वे भी स्थितियाँ हैं, जो कभी उल्लास, उमंग, आशा और ख़ुशियों का कारण बनती हैं तथा सुख में डालती हैं।











