Hindvi Swarajya Darshan: Shri Shiv Chhatrapati Durg Darshan Yatra Vritant
हिन्दवी स्वराज्य के ये दुर्ग सामान्य नहीं हैं। ये राजसी वैभव के प्रतीक तो कतई नहीं हैं। श्री शिव छत्रपति महाराज के ये किले स्वराज्य के प्रतीक हैं । भारतवर्ष जब विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों एवं दासता के अंधकार से घिरता जा रहा था, तब इन दुर्गों से स्वराज्य का संदेश देनेवाली मशाल जल उठी थी । इन दुर्गों के बुलंद बुर्ज पर खड़े होकर जब शिवाजी महाराज सिंहगर्जना करते होंगे और अपनी तलवार भवानी को लहराते होंगे, तब सह्याद्री के ऊपर फैले विशाल आकाश में एक बिजली-सी कौंधती होगी, जो मराठों के मन में आत्मविश्वास और साहस का संचार करती होगी। हिन्दवी स्वराज्य में दुर्ग केंद्रीय तत्व हैं। इसलिए हिन्दवी साम्राज्य के संस्थापक एवं स्वराज्य के उद्घोषक श्री शिव छत्रपति महाराज के व्यक्तित्व को समझना हो या फिर स्वराज्य की संकल्पना को, इन दुर्गों से संवाद करना आवश्यक है।
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हिन्दवी स्वराज्य के ये दुर्ग सामान्य नहीं हैं। ये राजसी वैभव के प्रतीक तो कतई नहीं हैं। श्री शिव छत्रपति महाराज के ये किले स्वराज्य के प्रतीक हैं । भारतवर्ष जब विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों एवं दासता के अंधकार से घिरता जा रहा था, तब इन दुर्गों से स्वराज्य का संदेश देनेवाली मशाल जल उठी थी । इन दुर्गों के बुलंद बुर्ज पर खड़े होकर जब शिवाजी महाराज सिंहगर्जना करते होंगे और अपनी तलवार भवानी को लहराते होंगे, तब सह्याद्री के ऊपर फैले विशाल आकाश में एक बिजली-सी कौंधती होगी, जो मराठों के मन में आत्मविश्वास और साहस का संचार करती होगी। हिन्दवी स्वराज्य में दुर्ग केंद्रीय तत्व हैं। इसलिए हिन्दवी साम्राज्य के संस्थापक एवं स्वराज्य के उद्घोषक श्री शिव छत्रपति महाराज के व्यक्तित्व को समझना हो या फिर स्वराज्य की संकल्पना को, इन दुर्गों से संवाद करना आवश्यक है।
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हिन्दवी स्वराज्य के ये दुर्ग सामान्य नहीं हैं। ये राजसी वैभव के प्रतीक तो कतई नहीं हैं। श्री शिव छत्रपति महाराज के ये किले स्वराज्य के प्रतीक हैं । भारतवर्ष जब विदेशी आक्रांताओं के अत्याचारों एवं दासता के अंधकार से घिरता जा रहा था, तब इन दुर्गों से स्वराज्य का संदेश देनेवाली मशाल जल उठी थी । इन दुर्गों के बुलंद बुर्ज पर खड़े होकर जब शिवाजी महाराज सिंहगर्जना करते होंगे और अपनी तलवार भवानी को लहराते होंगे, तब सह्याद्री के ऊपर फैले विशाल आकाश में एक बिजली-सी कौंधती होगी, जो मराठों के मन में आत्मविश्वास और साहस का संचार करती होगी। हिन्दवी स्वराज्य में दुर्ग केंद्रीय तत्व हैं। इसलिए हिन्दवी साम्राज्य के संस्थापक एवं स्वराज्य के उद्घोषक श्री शिव छत्रपति महाराज के व्यक्तित्व को समझना हो या फिर स्वराज्य की संकल्पना को, इन दुर्गों से संवाद करना आवश्यक है।











