Smritiyon Mein Tum
दिन उदास सा है। मन भीगा सा, साँसें मुरझाई और घर तुम्हारी पेंटिंग से जीता हुआ। तुम टी.वी. के बगल में मुस्कुरा रही हो। वही, पतंग वाली फोटो है पिछली संक्रांति की। अभी भी गुडमॉर्निंग करती हूँ। तुम्हारी पेंटिंग को, तुम्हारी रचनाशीलता को, तुम्हारी जिजीविषा को, तुम्हारी उम्मीद को, आशा और कोमल मन को दुनिया तक पहुँचाना चाहती हूँ। पर न मैं सेलिब्रिटी हूँ और न तुम। कोई क्यों पढ़ेगा हमारी कहानी ? एक आम माँ-बेटी की कहानी ! पर मैं भले ही विशिष्ट नहीं हूँ, तुम हो। तुम एक माँ की राजकुमारी हो। पिता के दिल का टुकड़ा हो। यह असमय अवसान पटाक्षेप नहीं है। यह मेरे जीवन की यात्रा का एक ध्येय है कि कैसे जीवन जिया जाता है, जिसे तुमने इन रंगों में भर दिया है। तुम्हारी स्मृति के कक्ष में यही एक आशा का दीपक है जिसे मैं कभी बुझने नहीं दूँगी। तुम जियो। हमारी कलम में, हमारी अनुभूतियों में, हमारी भावनाओं में। तुम अपनी यादों के सहारे हमें जीवन का संबल देती रहना। अपनी भोली मुस्कुराहट और मासूम सी आकांक्षाओं के बीच तुम्हारी रंगों की इस बहती नदी को हम अपनों तक अवश्य पहुँचाएँगे। यही सपना एक माँ के जीने का संबल है।
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दिन उदास सा है। मन भीगा सा, साँसें मुरझाई और घर तुम्हारी पेंटिंग से जीता हुआ। तुम टी.वी. के बगल में मुस्कुरा रही हो। वही, पतंग वाली फोटो है पिछली संक्रांति की। अभी भी गुडमॉर्निंग करती हूँ। तुम्हारी पेंटिंग को, तुम्हारी रचनाशीलता को, तुम्हारी जिजीविषा को, तुम्हारी उम्मीद को, आशा और कोमल मन को दुनिया तक पहुँचाना चाहती हूँ। पर न मैं सेलिब्रिटी हूँ और न तुम। कोई क्यों पढ़ेगा हमारी कहानी ? एक आम माँ-बेटी की कहानी ! पर मैं भले ही विशिष्ट नहीं हूँ, तुम हो। तुम एक माँ की राजकुमारी हो। पिता के दिल का टुकड़ा हो। यह असमय अवसान पटाक्षेप नहीं है। यह मेरे जीवन की यात्रा का एक ध्येय है कि कैसे जीवन जिया जाता है, जिसे तुमने इन रंगों में भर दिया है। तुम्हारी स्मृति के कक्ष में यही एक आशा का दीपक है जिसे मैं कभी बुझने नहीं दूँगी। तुम जियो। हमारी कलम में, हमारी अनुभूतियों में, हमारी भावनाओं में। तुम अपनी यादों के सहारे हमें जीवन का संबल देती रहना। अपनी भोली मुस्कुराहट और मासूम सी आकांक्षाओं के बीच तुम्हारी रंगों की इस बहती नदी को हम अपनों तक अवश्य पहुँचाएँगे। यही सपना एक माँ के जीने का संबल है।
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दिन उदास सा है। मन भीगा सा, साँसें मुरझाई और घर तुम्हारी पेंटिंग से जीता हुआ। तुम टी.वी. के बगल में मुस्कुरा रही हो। वही, पतंग वाली फोटो है पिछली संक्रांति की। अभी भी गुडमॉर्निंग करती हूँ। तुम्हारी पेंटिंग को, तुम्हारी रचनाशीलता को, तुम्हारी जिजीविषा को, तुम्हारी उम्मीद को, आशा और कोमल मन को दुनिया तक पहुँचाना चाहती हूँ। पर न मैं सेलिब्रिटी हूँ और न तुम। कोई क्यों पढ़ेगा हमारी कहानी ? एक आम माँ-बेटी की कहानी ! पर मैं भले ही विशिष्ट नहीं हूँ, तुम हो। तुम एक माँ की राजकुमारी हो। पिता के दिल का टुकड़ा हो। यह असमय अवसान पटाक्षेप नहीं है। यह मेरे जीवन की यात्रा का एक ध्येय है कि कैसे जीवन जिया जाता है, जिसे तुमने इन रंगों में भर दिया है। तुम्हारी स्मृति के कक्ष में यही एक आशा का दीपक है जिसे मैं कभी बुझने नहीं दूँगी। तुम जियो। हमारी कलम में, हमारी अनुभूतियों में, हमारी भावनाओं में। तुम अपनी यादों के सहारे हमें जीवन का संबल देती रहना। अपनी भोली मुस्कुराहट और मासूम सी आकांक्षाओं के बीच तुम्हारी रंगों की इस बहती नदी को हम अपनों तक अवश्य पहुँचाएँगे। यही सपना एक माँ के जीने का संबल है।











