Urdu Ki Sarvshreshth Kahaniyan
उर्दू में कहानी या अफ़साना कहने की परम्परा बहुत पुरानी है। इस किताब में उर्दू की ऐसी पन्द्रह चुनिन्दा कहानियाँ हैं जिनकी रचना बीसवीं सदी के आसपास हुई, लेकिन जो आज भी हर तरीके से सर्वश्रेष्ठ हैं। जहाँ एक ओर इसमें मंटो, इस्मत चुगताई, राजेन्द्रसिंह बेदी, कृश्नचन्दर जैसे जाने-पहचाने नाम हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लेखक हैं जिनसे आज के पाठक शायद ही परिचित होंगे। इन कहानियों का चयन और अनुवाद हिन्दी के विख्यात सम्पादक प्रकाश पंडित द्वारा किया गया है। हिन्दी के पाठकों को उर्दू के समृद्ध साहित्य से वाकिफ़ कराने का श्रेय प्रकाश पंडित को जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले उर्दू शायरों की शायरी का देवनागरी में लिप्यांतरण कर हिन्दी पाठकों के सामने प्रस्तुत किया। शायरी के अतिरिक्त उन्होंने कई कहानियों की किताबों का सम्पादन और अनुवाद किया। इन्हीं में से एक यह पुस्तक है, जो 1958 में पहली बार राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रकाश पंडित एक कुशल सम्पादक और अनुवादक होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे। इस पुस्तक की आखिरी कहानी उन्हीं की लिखी हुई है। इन पन्द्रह कहानियों को पढ़कर यह बात समझ में आती है कि अच्छी कहानियाँ समय और सरहद से बाधित नहीं होतीं। अच्छी कहानी केवल अच्छी होती हैं - चाहे किसी भी युग में या किसी भी भाषा में लिखी गई हो।
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उर्दू में कहानी या अफ़साना कहने की परम्परा बहुत पुरानी है। इस किताब में उर्दू की ऐसी पन्द्रह चुनिन्दा कहानियाँ हैं जिनकी रचना बीसवीं सदी के आसपास हुई, लेकिन जो आज भी हर तरीके से सर्वश्रेष्ठ हैं। जहाँ एक ओर इसमें मंटो, इस्मत चुगताई, राजेन्द्रसिंह बेदी, कृश्नचन्दर जैसे जाने-पहचाने नाम हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लेखक हैं जिनसे आज के पाठक शायद ही परिचित होंगे। इन कहानियों का चयन और अनुवाद हिन्दी के विख्यात सम्पादक प्रकाश पंडित द्वारा किया गया है। हिन्दी के पाठकों को उर्दू के समृद्ध साहित्य से वाकिफ़ कराने का श्रेय प्रकाश पंडित को जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले उर्दू शायरों की शायरी का देवनागरी में लिप्यांतरण कर हिन्दी पाठकों के सामने प्रस्तुत किया। शायरी के अतिरिक्त उन्होंने कई कहानियों की किताबों का सम्पादन और अनुवाद किया। इन्हीं में से एक यह पुस्तक है, जो 1958 में पहली बार राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रकाश पंडित एक कुशल सम्पादक और अनुवादक होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे। इस पुस्तक की आखिरी कहानी उन्हीं की लिखी हुई है। इन पन्द्रह कहानियों को पढ़कर यह बात समझ में आती है कि अच्छी कहानियाँ समय और सरहद से बाधित नहीं होतीं। अच्छी कहानी केवल अच्छी होती हैं - चाहे किसी भी युग में या किसी भी भाषा में लिखी गई हो।
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उर्दू में कहानी या अफ़साना कहने की परम्परा बहुत पुरानी है। इस किताब में उर्दू की ऐसी पन्द्रह चुनिन्दा कहानियाँ हैं जिनकी रचना बीसवीं सदी के आसपास हुई, लेकिन जो आज भी हर तरीके से सर्वश्रेष्ठ हैं। जहाँ एक ओर इसमें मंटो, इस्मत चुगताई, राजेन्द्रसिंह बेदी, कृश्नचन्दर जैसे जाने-पहचाने नाम हैं तो वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लेखक हैं जिनसे आज के पाठक शायद ही परिचित होंगे। इन कहानियों का चयन और अनुवाद हिन्दी के विख्यात सम्पादक प्रकाश पंडित द्वारा किया गया है। हिन्दी के पाठकों को उर्दू के समृद्ध साहित्य से वाकिफ़ कराने का श्रेय प्रकाश पंडित को जाता है। उन्होंने ही सबसे पहले उर्दू शायरों की शायरी का देवनागरी में लिप्यांतरण कर हिन्दी पाठकों के सामने प्रस्तुत किया। शायरी के अतिरिक्त उन्होंने कई कहानियों की किताबों का सम्पादन और अनुवाद किया। इन्हीं में से एक यह पुस्तक है, जो 1958 में पहली बार राजपाल एण्ड सन्ज़ से प्रकाशित हुई थी। बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रकाश पंडित एक कुशल सम्पादक और अनुवादक होने के साथ-साथ एक लेखक भी थे। इस पुस्तक की आखिरी कहानी उन्हीं की लिखी हुई है। इन पन्द्रह कहानियों को पढ़कर यह बात समझ में आती है कि अच्छी कहानियाँ समय और सरहद से बाधित नहीं होतीं। अच्छी कहानी केवल अच्छी होती हैं - चाहे किसी भी युग में या किसी भी भाषा में लिखी गई हो।











