Wahi Mera Khuda Hoga
दिव्या प्रेम के भाव के जिन क्षणों मैं भीतर असीम का अनुभव हुआ, यह रचना उसी की अभिव्यक्ति है| यह शब्द किसी विचार से नहीं बल्कि निर्विचार से उत्पन्न हुए हैं, मनो अंतस मैं जमी हुई कोई सतह पिघल कर उन्मुक्त झरने की तरह बह निकले|जिसे प्रेरणा ने इस रचना को संभव किया, उसके प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करना कठिन है| वह मन, बुद्धि, शरीर, फ़ासले के प्रभाव से स्वतंत्र तथा मानव नियंत्रण से बहार है| जैसी पंक्तियां उसने मुझे सुनाईं - निमित्त की भांति मैंने उन्हें कागज़ पर उतर दिया| - हरकीरत
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दिव्या प्रेम के भाव के जिन क्षणों मैं भीतर असीम का अनुभव हुआ, यह रचना उसी की अभिव्यक्ति है| यह शब्द किसी विचार से नहीं बल्कि निर्विचार से उत्पन्न हुए हैं, मनो अंतस मैं जमी हुई कोई सतह पिघल कर उन्मुक्त झरने की तरह बह निकले|जिसे प्रेरणा ने इस रचना को संभव किया, उसके प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करना कठिन है| वह मन, बुद्धि, शरीर, फ़ासले के प्रभाव से स्वतंत्र तथा मानव नियंत्रण से बहार है| जैसी पंक्तियां उसने मुझे सुनाईं - निमित्त की भांति मैंने उन्हें कागज़ पर उतर दिया| - हरकीरत
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दिव्या प्रेम के भाव के जिन क्षणों मैं भीतर असीम का अनुभव हुआ, यह रचना उसी की अभिव्यक्ति है| यह शब्द किसी विचार से नहीं बल्कि निर्विचार से उत्पन्न हुए हैं, मनो अंतस मैं जमी हुई कोई सतह पिघल कर उन्मुक्त झरने की तरह बह निकले|जिसे प्रेरणा ने इस रचना को संभव किया, उसके प्रति कृतज्ञता अभिव्यक्त करना कठिन है| वह मन, बुद्धि, शरीर, फ़ासले के प्रभाव से स्वतंत्र तथा मानव नियंत्रण से बहार है| जैसी पंक्तियां उसने मुझे सुनाईं - निमित्त की भांति मैंने उन्हें कागज़ पर उतर दिया| - हरकीरत











